प्रयोजनमूलक हिंदी के नए आयाम हिंदी भाषा के विविध प्रयोजनपरक रूपों पर गहन विचार प्रस्तुत करती है। आधुनिक युग में हिंदी केवल साहित्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि कार्यालय, विज्ञान, तकनीक, वाणिज्य, बैंकिंग, रेल, जनसंचार, पत्रकारिता, कम्प्यूटिंग और अनुवाद जैसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है। इस पुस्तक में प्रयोजनमूलक हिंदी की परिभाषा, विशेषताएँ, आवश्यकता, महत्त्व और चुनौतियों का सुव्यवस्थित विवेचन किया गया है।
पुस्तक में कार्यालयीन हिंदी के प्रमुख कार्य—प्रारूपण, संक्षेपण, पल्लवन और टिप्पण—के साथ-साथ वैज्ञानिक एवं तकनीकी हिंदी, बैंकिंग क्षेत्र की हिंदी, पारिभाषिक शब्दावली, मीडिया लेखन, रेडियो-नाटक, टेलीविजन कार्यक्रम, पत्रकारिता, पटकथा लेखन और अनुवाद के विविध पक्षों को विस्तार से समझाया गया है। यह ग्रंथ न केवल छात्रों और शोधार्थियों के लिए शिक्षणोपयोगी है, बल्कि हिंदी के व्यावहारिक स्वरूप को अपनाने वाले सभी पाठकों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
बहुभाषी भारत में प्रयोजनमूलक हिंदी का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। यह पुस्तक हिंदी भाषा के नए आयामों को उजागर करती है और पाठकों को यह समझने में सक्षम बनाती है कि हिंदी किस प्रकार आधुनिक समाज, शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जुड़ रही है।
1. प्रयोजनमूलक हिंदी का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएँ
- डॉ. पोपट भावराव बिरारी
2. पत्रकारिता और शीर्षक लेखन
- डॉ. जिनु जॉन
3. हिंदी के विभिन्न प्रयुक्ति क्षेत्र
- हरिमोहन गुप्ता
4. प्रयोजनमूलक हिंदी की आवश्यकता और महत्त्व
- प्रा. स्नेहा प्रदीप हिंगमिरे
5. प्रयोजनमूलक हिंदी प्रासंगिकता और चुनौतियाँ
- डॉ. रेवा प्रसाद
6. प्रयोजनमूलक हिंदी में रोजगार की संभावनाएँ
- डॉ. रेशमा एल. नदाफ
7. कामकाजी हिंदी के विविध रूप
- डॉ. रीना थॉमस
8. कार्यालयीन हिंदी के प्रमुख कार्य : प्रारूपण, संक्षेपण, पल्लवन, टिप्पण
- डॉ. पार्वती कच्छप
9. वैज्ञानिक और तकनीकी हिंदी का प्रयोग
- डॉ. झुनुबाला खुण्टिआ
10. बैंकिंग क्षेत्र मे हिंदी का प्रयोग एवं समस्याएँ
- शिल्पा पी. सी.
11. पारिभाषिक शब्दावली : स्वरूप
- डॉ. ललित चंद्र जोशी
12. हिंदी सॉफ्टवेयर का परिचय
- आशीष कुमार
13. जनसंचार माध्यम का स्वरूप
- डॉ. निशाराणी महादेव देसाई
14. जनसंचार माध्यम का वर्गीकरण
- डॉ. बेबी श्रीमंत खिलारे
15. मीडिया लेखन : प्रकार, भाषा और विशेषताएँ
- डॉ. बालस्वरूप द्विवेदी
16. टेलीविजन कार्यक्रम का स्वरूप
- डॉ. अवधेश कुमार मेहता
17. हिंदी रेडियो नाटक : एक प्रभावशाली माध्यम
- सस्मिता पति
18. हिंदी कम्प्यूटिंग
- डॉ. दिपाश्री कैलास गडाख
19. हिंदी का बढ़ता डिजिटलीकरण
- प्रो. डॉ. अनीता रानी कन्नौजिया
20. रिपोर्ताज लेखन का स्वरूप और महत्व
- डॉ. बिहारी लाल द्विवेदी
21. पटकथा लेखन का स्वरूप और मूल तत्व
- डॉ. मुजावर एस. टी.
22. रेडियो नाटक लेखन का स्वरूप और प्रक्रिया
- प्रा. जनार्दन नामदेव वाघ
23. साहित्य और सिनेमा
- डॉ. मनिषा राजेश घरत
24. पत्रकारिता : स्वरूप एवं विभिन्न प्रकार
- अनुपम कुमार
25. वर्तमान महिला पत्रकारिता : एक चुनौती
- डॉ. ओम प्रकाश सैनी (डी.लिट्)
26. भाषा एवं संस्कृति : हिंदी सिनेमा में बदलता स्वरूप
- डॉ. अश्विनी अशोक देशिंग
27. अनुवाद : परिभाषा और स्वरूप
- डॉ. वै. उमा
28. अनुवाद के प्रकार
- डॉ. नीना मेहता
29. साहित्येतर अनुवाद के विविध क्षेत्र
- डॉ. संजीव कुमार विश्वकर्मा
30. साहित्यिक अनुवाद का स्वरूप और महत्व
- श्रीदेवी एस.
31. अनुवाद प्रक्रिया का स्वरुप एवं महत्व
- तिवारी अनुजा जयशंकर
32. कार्यालयीन हिंदी और अनुवाद
- सुखपाल कौर
33. हिंदी अनुवाद और रोजगार की संभावनाएँ
- प्रा. डॉ. ऐनुर एस. शेख
34. उच्च शिक्षा में अनुवाद और भाषा विज्ञान का महत्व
- डॉ. कांबले प्रकाश अभिमन्यू
35. अनुवाद मूल्यांकन
- उदय चिमा बेंढारी