निरामय और आनंदमय जीवन का रहस्य जानकर संतुष्ट और सुखी जीवन जीना ही बुद्धिमत्ता है| जीवन की सभी राहें सीधी नहीं होतींउनमें कई मोड़ आते हैं| उन मोड़ों पर सही निर्णय लेना और परिस्थिति के अनुसार सजग रहना ही समझदारी है|
मानव शरीर विज्ञान का सम्पूर्ण ज्ञान मनुष्य को प्राप्त हुआ है, ऐसा कहना अतिशयोक्ति होगा| ईश्वर ने सुप्त शक्तियों के माध्यम से पुनरुत्पादन की प्रक्रिया निरंतर चालू रखी है| नवजात शिशु का जन्म, उसके शारीरिक अंगों का विकास और सुरक्षा की परंपरायह सब प्रकृति द्वारा विकसित होता आया है|
पहले शिशु के जन्म के समय काटी गई नाल को अनुपयोगी समझकर फेंक दिया जाता था| लेकिन अब यह ज्ञात हुआ है कि उस नाल में शिशु और उसके परिवार के लिए सुरक्षा कवच छिपा होता है| शिशु की नाल में लगभग 300 प्रकार के रोगों को दूर करने की क्षमता होती है; इसलिए उसका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है|
मानव शरीर की सभी नियंत्रक नसें नाभि में केंद्रित होती हैं| नाभि का महत्व समझकर उसके अनुसार आचरण करना ही निरामय और आनंदमय जीवन का सार है|