भारतीय संत साहित्य : विविध आयाम

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Publisher: Prime Publishing House
ISBN: 9789395596947
Year: 2025
Pages: 204

प्राक्कथन में संत काव्यधारा के दार्शनिक और सांस्कृतिक आधारों का विवेचन किया गया है। उपनिषदों का संतों के चिंतन, जीवन-दर्शन और काव्यधारा पर गहरा प्रभाव रहा है। आचार्य शंकर की विचारधारा ने संतों की साधना-पद्धति और भक्ति-भावना को दिशा दी। निर्गुण और सगुण दोनों ही संत कवियों ने यह प्रतिपादित किया कि जीव विशुद्ध ब्रह्मतत्त्व है और भिन्नता केवल माया या अविद्या की उपाधि है। संत साहित्य आज भी समाज को सही दिशा देने में सक्षम है।

संतों का हृदय करुणामय, निष्पाप और निःस्वार्थ होता है। उनका हर कार्य लोकहित के लिए होता है। संत साहित्य अपने युग की प्रासंगिकता का बहुमूल्य दस्तावेज है, जिसमें ईश्वर-भक्ति और लोकमंगल की भावना निहित है। यह साहित्य मानव को नैतिक मूल्यों के संस्कार देता है। संत परंपरा में आत्मा की अखण्डता, अद्वैत और अकथनीयता का प्रतिपादन शंकर-सिद्धांत के अनुरूप है। नाथपंथ का भी संत काव्य और दर्शन पर गहरा प्रभाव रहा है, विशेषकर योग-साधना की प्रधानता में।

संत संप्रदाय के विचार विश्वकल्याण के हैं। गुरु को ब्रह्म से भी महान माना गया है। संत साहित्य आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है और जीवन को संयम, त्याग, अहिंसा, सदाचार और परोपकार की दिशा देता है। समाज और साहित्य का गहरा संबंध है, और संत साहित्य समाज सुधार की भावना को प्रोत्साहित करता है।

भारत में भक्ति की लहर दक्षिण से उत्तर तक फैली। निर्गुण संत कबीर हों या सगुण रामभक्ति के तुलसीदास, कृष्णभक्ति की मीराबाई हों या सूरदास—सभी ने ईश्वर-भक्ति को महत्त्व दिया। संत साहित्य भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा है और विभिन्न भक्ति संप्रदायों के संतों ने इसे समृद्ध किया है।

लेखिका ने इस पुस्तक की रचना में परिवार और सहकर्मियों के सहयोग को मान्यता दी है। प्रस्तुत ग्रंथ से शोधकर्ताओं और छात्रों को संत साहित्य के विविध आयामों का परिचय मिलेगा और यह अध्ययन के लिए उपयुक्त सिद्ध होगा।

1. संत साहित्य का सामाजिक अवदान
- प्रो. सुकर्मवती देवी
2. भारतीय संत परंपरा और भक्ति आंदोलन का स्वरूप
- डॉ. पोपट भावराव बिरारी
3. संतचरितात्मक भक्ति आख्यान
- डॉ. संजीव कुमार विश्वकर्मा
4. ज्ञानमाग निर्गुण काव्यधारा : प्रभाव और विस्तार
- प्रेमदास
5. निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत कवि
- डॉ. बिंदु कनौजिया
6. भारत में राम भक्ति साहित्य का प्रसार
- डॉ. पार्वती कच्छप
7. संत नामदेव का परिचय और दार्शनिक पक्ष
- डॉ. बालस्वरूप द्विवेदी
8. गोरखनाथ का परिचय और हठयोग साधना
- डॉ. पूनम जिभाऊ बोरसे
9. संत कबीर का दार्शनिक चिंतन और भक्ति-भावना
- कर्रा पृथ्वी
10. संत तुलसीदास का साहित्य और समाज सुधारक रूप
- डॉ. बिहारी लाल द्विवेदी
11. संत मीराबाई की भक्ति-भावना
- डॉ. नीना मेहता
12. संत रैदास की भक्ति-भावना
- हरिमोहन गुप्ता
13. अष्टछाप के कृष्ण भक्त संत कवि
- डॉ. योगिता अपूर्व हिरे
14. सूरदास का काव्य और भक्ति-भावना
- नवल कुमार पाठक
15. नंददास के काव्य में भक्ति और प्रेम-तत्व
- डॉ. सौरभ दवे
16. रसखान का काव्य और भक्ति-भावना
- ज्योति अजय सिंह
17. गरु नानक का जीवन परिचय एवं रचनाएँ
- आशीष कुमार
18. क्रांतदश संत तुकाराम के काव्य की प्रासंगिकता
- डॉ. भरत त्र्यंबक शेणकर
19. संत ज्ञानेश्वर के साहित्य में सामाजिक एवं दार्शनिक विचार
- डॉ. भारती बाळकृष्ण धोंगडे
20. संत चोखामेळा का परिचय और भक्ति-भावना
- श्रीमती अर्चना झा

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