भारतीय ज्ञान परंपरा

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Publisher: Prime Publishing House
ISBN: 9789395605991
Year: 2025
Pages: 222

प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध और वैभवशाली रही है। इसका उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को समाहित करते हुए व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना रहा है। भारत के मनीषियों ने उच्चतम ज्ञान का प्रसार करके मानव को अज्ञानता और पशुता से मुक्त कर श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त मानवता बनाए रखने का कार्य किया। भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय ज्ञान और प्रज्ञा का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत समन्वय है। वेदों में विद्या को मनुष्यता की श्रेष्ठता का आधार माना गया है। शिक्षा प्रणाली ने मानसिक और शारीरिक विकास दोनों पर ध्यान केंद्रित किया।

प्राचीन शिक्षा प्रणाली ज्ञान, परंपराएँ और प्रथाएँ मानव को प्रोत्साहित करती थीं। भारत में तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी, उज्जैन और काशी जैसे शिक्षा केंद्र तत्कालीन विश्व प्रसिद्ध थे, जहाँ विदेशों से भी विद्यार्थी ज्ञानार्जन के लिए आते थे। वर्तमान समय में नई शिक्षा नीति भारतीय परंपरा और गौरव को महत्व देती है। आज भारतीय ज्ञान की उपादेयता को देखते हुए विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को पढ़ाया जा रहा है ताकि छात्रों को प्राचीन भारतीय ज्ञान का परिचय हो और वे जीवन में उसका उपयोग कर सकें।

भारतीय ज्ञान परंपरा ने धर्म, दर्शन, अध्यात्म, आयुर्वेद, योग आदि के माध्यम से विश्व को अमूल्य देन दी है। वेद, पुराण, महाभारत, रामायण से लेकर चरक और सुश्रुत के योगदान तक, मध्यकालीन ज्ञान परंपरा, भक्ति आंदोलन, स्वतंत्रता की राष्ट्रीय भावना और आधुनिक विज्ञान—इन सभी में परस्पर संबंध स्पष्ट दिखाई देता है। भारतीय दर्शन की दृष्टि से ज्ञान का विशेष महत्व है। चार्वाक, जैन, बौद्ध, न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदांत जैसे दर्शन ज्ञान परंपरा के अंग रहे हैं।

भारत ने संख्या प्रणाली का आविष्कार किया और शून्य से अनंत तक की अवधारणा दी। योग, वेदांग, आयुर्वेद और वैदिक विज्ञान आज भी आधुनिक दुनिया में उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति, पर्यावरण और मानव सदैव केंद्र में रहे हैं। विश्व को शांति, करुणा, दया और सहयोग जैसे मानवीय मूल्यों से जोड़कर रखने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

लेखिका ने इस ग्रंथ की रचना में परिवार, सहकर्मियों और विद्वानों के सहयोग को मान्यता दी है। प्रस्तुत पुस्तक से अनेक शोधकर्ता और छात्र लाभान्वित होंगे, ऐसी आशा व्यक्त की गई है।

1. ज्ञान की अवधारणा और ज्ञान की प्रकृति
- डॉ. पोपट भावराव बिरारी
2. भारतीय ज्ञान परंपरा का स्वरूप
- तिवारी अनुजा जयशंकर
3. भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता
- इला गुप्ता
4. भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा
- डॉ. सुप्रिया शालिनि
5. वैदिक साहित्य और ज्ञान परंपरा
- विवेक कुमार दीक्षित
6. भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा
- डॉ. संजीव कुमार विश्वकर्मा
7. प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक और ज्ञान परंपरा
- कर्रा पृथ्वी
8. प्राचीन भारतीय शिक्षा और ज्ञान परंपरा
- डॉ. अशोक अभिषेक
9. सिद्ध साहित्य और ज्ञान परंपरा
- डॉ. कंचन कुड़चीकर
10. बौद्ध दर्शन और ज्ञान परंपरा
- पूर्णिमा सिंह
11. योग और ज्ञान परंपरा
- डॉ. बर्णाली गोगोई
12. आयुर्वेद और ज्ञान परंपरा
- गायत्री पटेल
13. साहित्य और ज्ञान परंपरा
- प्रा. डॉ. ऐनूर शब्बीर शेख
14. प्राचीन भारतीय कला और ज्ञान परंपरा
- डॉ. अवधेश कुमार मेहता
15. ज्ञान परंपरा और संत काव्य में निहित मानव मूल्य
- प्रा. डॉ. भरत शेणकर
16. वेदों में जल का महत्व
- डॉ. हार्दिक पाठक
17. ज्योतिषशास्त्र और ज्ञान परंपरा
- डॉ. सौरभ दवे
18. भारतीय सामाजिक संस्था और ज्ञान परंपरा
- डॉ. बिहारी लाल द्विवेदी
19. भारतीय ज्ञान परंपरा और अनुवाद
- डॉ. कांबळे प्रकाश अभीमन्यू
20. श्रीमद्भगवद्गीता और ज्ञान परंपरा
- प्रभात कुमार

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