{"product_id":"ranangan-rachayita-d-b-jagtpuriya","title":"रणांगण - रचयिता डी. बी. जगत्पुरिया","description":"\u003cp style=\"text-align: center;\"\u003e\u003cstrong\u003eचिंतक प्रतिभा की ऊर्जावान कविता!\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eडी. बी. जगत्पुरिया के ‘रणांगण’ संग्रह की अनुदित कविताओं में रचनात्मक ऊर्जा, संवदेना एवं वैचारिक पक्षधरता की त्रिवेणी प्रवाहित है| कवि को भूखे मन की व्याकुलता का क़यास है, जनता की आँखों के आँसुओं का एहसास है और शोषित, पीड़ित लोगों के प्रति गहरा आभास है| ये कविताएँ प्रजातांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मूल्यों के नाम पर चल रहे ‘गड़बड़झाले’ को निरावृत्त करती चलती हैं तथा एक ऐसी व्यवस्था के विद्रुपों को उद्घाटित करने में प्रयासरत हैं, जो चालाकी और शोषण पर टिकी है| इन कविताओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किकता, चिंतन और पैनी परख होना कवि को बधाई का पात्र बनाता है|\u003cbr\u003eमानव जीवन के हरेक क्षेत्र से जुड़े हुए अनुभवों को कविताओं की विषयवस्तु बना कर कवि ने अपनी सुदीर्घ काव्य-प्रतिभा का निचोड़ प्रस्तुत किया है| ये कविताएँ जीवन का काव्यात्मक अनुवाद हैं जो संवेग व संघर्ष की उस क़लम से लिखी गईं हैं, जिस में यथार्थता अपनी पूरी गरिमा के साथ उपस्थित है| मनुष्यता को खोजने की चाहत लेकर कविअनुभूतियों के आसपास वैज्ञानिक ढंग से अपना काव्य-भूगोल रचते हैं, जहाँ हर शोषित चेहरा संघर्षरत नज़र आता है| मानवता की अपरिभाषेय ऊँचाई की तहक़ीक़ात करनेवाली एवं विषमताओं की विकरालता नापती ये अनुदित कविताएँ एक सार्थक-साहित्यिक सृजन हैं|\u003c\/p\u003e\n\u003cp style=\"text-align: right;\"\u003e\u003cstrong\u003e- डॉ. युवराज सोनटक्के\u003c\/strong\u003e\u003cbr\u003eबेंगलुरु (कर्नाटक)\u003c\/p\u003e","brand":"Prime Publishing House","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52793546047807,"sku":null,"price":135.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0977\/4071\/8399\/files\/Ranangan_KavyaSangrah__DBJagtpuriya_1.jpg?v=1776347169","url":"https:\/\/primebookss.in\/products\/ranangan-rachayita-d-b-jagtpuriya","provider":"Prime Publishing House","version":"1.0","type":"link"}