{"product_id":"hindi-sahitya-me-chitrit-samkalin-vimarsh","title":"हिंदी साहित्य में चित्रित समकालीन विमर्श","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eप्राक्कथन में यह स्पष्ट किया गया है कि हिंदी साहित्य समकालीन विमर्शों को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है। आज समाज का वह वर्ग जो वंचित है, अपने अधिकारों और अस्मिता की पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है। साहित्यकारों ने स्त्री, दलित, आदिवासी, किन्नर, किसान, बालक, वृद्ध और पर्यावरण जैसे ज्वलंत विषयों को अपनी रचनाओं में स्थान दिया है। इस दृष्टि से ‘हिंदी साहित्य में चित्रित समकालीन विमर्श’ यह पुस्तक अत्यंत उपयुक्त सिद्ध होती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eइक्कीसवीं सदी को विविध विमर्शों की सदी कहा जा सकता है। स्त्री-विमर्श सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बना है, जिसमें स्त्री अपने अधिकार और स्थान की मांग करती है। दलित-विमर्श दलितों की पीड़ा और सामाजिक अन्याय को सामने लाता है। आदिवासी-विमर्श उनकी भाषा और संस्कृति के अस्तित्व संकट को उजागर करता है। किन्नर-विमर्श उनकी सामाजिक अपेक्षाओं और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करता है। किसान, बालक और वृद्धों की समस्याएँ भी साहित्य में गहराई से चित्रित हुई हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eइस पुस्तक में समकालीन विमर्शों का बहुआयामी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, चित्रा मुद्गल, मृदुला गर्ग, त्रिलोचन जैसे साहित्यकारों की रचनाओं में इन विमर्शों की झलक मिलती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eलेखिका ने इस ग्रंथ की रचना में परिवार और विद्वानों के सहयोग को मान्यता दी है। प्रस्तुत पुस्तक शोधकर्ताओं, छात्रों और हिंदी साहित्य में रुचि रखने वालों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prime Publishing House","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52788892664127,"sku":null,"price":315.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0977\/4071\/8399\/files\/HindiSahityaMeSamkalin_Hindi_PopatBirari_1.jpg?v=1776256394","url":"https:\/\/primebookss.in\/products\/hindi-sahitya-me-chitrit-samkalin-vimarsh","provider":"Prime Publishing House","version":"1.0","type":"link"}