{"product_id":"anuwad-swarup-bhed-ekm-vyavahar","title":"अनुवाद : स्वरूप, भेद एवं व्यवहार","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e\u003cstrong\u003eअनुवाद : स्वरूप, भेद एवं व्यवहार\u003c\/strong\u003e केवल भाषाओं के बीच शब्दों का रूपांतरण नहीं है, बल्कि विचारों, संस्कृतियों और ज्ञान का सेतु है। आधुनिक युग में विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, प्रशासन, पत्रकारिता और साहित्य—हर क्षेत्र में अनुवाद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eयह पुस्तक अनुवाद की संकल्पना, प्रक्रिया, प्रकार और व्यवहारिक पक्षों पर गहन प्रकाश डालती है। इसमें साहित्यिक अनुवाद (काव्य, कथा, नाटक, निबंध) से लेकर साहित्येतर अनुवाद (विज्ञापन, समाचार पत्र, संविधान, विधि, बैंक, रेल, रक्षा, कृषि, खेल आदि) तक का सुव्यवस्थित विवेचन किया गया है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eपुस्तक में स्रोत भाषा और लक्ष्य भाषा के संबंध, समतुल्यता का सिद्धांत, अनुवादक के आवश्यक गुण तथा विविध क्षेत्रों में अनुवाद की उपयोगिता को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ छात्रों, शोधार्थियों और अध्यापकों के लिए शिक्षणोपयोगी सामग्री प्रदान करता है और अनुवाद कौशल विकसित करने में सहायक सिद्ध होता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eबहुभाषी भारत में अनुवाद की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह पुस्तक न केवल शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के लिए उपादेय है, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी अनुवाद की महत्ता को समझने और अपनाने में मार्गदर्शक है। हिंदी जगत के विद्यार्थियों और पाठकों के लिए यह ग्रंथ एक उपयोगी संदर्भ पुस्तक के रूप में लाभकारी सिद्ध होगा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prime Publishing House","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52698604863807,"sku":null,"price":144.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0977\/4071\/8399\/files\/Anuvad-SwarupBhedEvanVyavahar_DrPopatBirari_1.jpg?v=1775373164","url":"https:\/\/primebookss.in\/products\/anuwad-swarup-bhed-ekm-vyavahar","provider":"Prime Publishing House","version":"1.0","type":"link"}