{"title":"क्रमिक पुस्तके","description":"","products":[{"product_id":"bharatiy-dnyan-parmpara","title":"भारतीय ज्ञान परंपरा","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eप्राचीन भारतीय शिक्षण परंपरा ही खरोखर वैशिष्ट्यपूर्ण आणि अद्वितीय आहे. गुरुकुल पद्धतीत ऋषी-मुनींनी शिष्यांना विविध विद्यांमध्ये पारंगत केले. योगसाधना, साहित्य, संगीत, कला, दर्शनशास्त्र, विज्ञान, खगोलशास्त्र, आरोग्य, युद्धकला अशा सर्व ज्ञान-विज्ञान शाखा परंपरेने पिढ्यान्पिढ्या चालत आल्या. या परंपरेत व्यक्तिमत्त्व विकास, मानवी सभ्यता, राष्ट्रीय एकात्मता यांचा सांस्कृतिक पाया दृढ झाला.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकेंद्र सरकारच्या नवीन शैक्षणिक धोरणात भारतीय ज्ञानपरंपरेचा समावेश करून अभ्यासक्रमात आमूलाग्र बदल करण्यात आले आहेत. यामुळे तरुण पिढीला सर्वोत्तम मार्गदर्शन मिळावे आणि भारताच्या उज्ज्वल भविष्याचा वेध घ्यावा, हा उद्देश साधला जात आहे.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eया पुस्तकाच्या पहिल्या प्रकरणात भारतीय ज्ञान परंपरेचे महत्व, वेद-वेदांग, उपनिषदे, त्रिपिटक, तसेच सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिका, वेदांत, जैन, बौद्ध, चार्वाक यांसारख्या वेदिक-अवेदीक दर्शनांचा सखोल परिचय दिला आहे.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eदुसऱ्या प्रकरणात भास्कराचार्य, तक्षशिला, नालंदा, कांची, कौटिल्य, पाणिनी, आर्यभट्ट, वराहमिहीर, तसेच फाहियान, ह्युएनत्संग, इत्सिंग यांसारख्या प्रवाशांनी दिलेल्या माहितीचा समावेश आहे.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eतिसऱ्या प्रकरणात कृषी, व्यापार, वाणिज्य, तसेच दळणवळणाची साधने यांचा अभ्यासपूर्ण आढावा घेतला आहे.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eचौथ्या प्रकरणात भारतीय कला, नाट्यशास्त्र, चित्रकला, शिल्पकला, गुहा वास्तुकला, मंदिर वास्तुकला, अजिंठा, वेरुळ, खजुराहो, तसेच धातुशास्त्र, खगोलशास्त्र, वैद्यकशास्त्र यांचा सखोल विवेचन केलेले आहे.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eया ग्रंथाच्या लेखनासाठी अनेक संदर्भग्रंथांचा आधार घेतला असून, प्रा. ए. पी. चौधरी यांचे मार्गदर्शन प्रेरणादायी ठरले आहे. प्राईम पब्लिशिंग हाऊसचे संचालक श्री. प्रदीप पाटील यांनी हे पुस्तक प्रकाशित केले आहे.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eतुम्हाला हवे असल्यास मी या पुस्तकातील एखाद्या प्रकरणाचा \u003cstrong\u003eसविस्तर सारांश\u003c\/strong\u003e तयार करून देऊ शकतो. उदाहरणार्थ वेदिक दर्शन, प्राचीन विद्यापीठे, किंवा भारतीय कला व स्थापत्य.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Prime Publishing House","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52788581368127,"sku":null,"price":293.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0977\/4071\/8399\/files\/BhartiyaDnyan_ProfAPChaudhari_1.jpg?v=1776249914"},{"product_id":"bhartiya-gyan-parampara_hindi","title":"भारतीय ज्ञान परंपरा","description":"\u003cdiv data-testid=\"chat-page\"\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eप्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध और वैभवशाली रही है। इसका उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को समाहित करते हुए व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना रहा है। भारत के मनीषियों ने उच्चतम ज्ञान का प्रसार करके मानव को अज्ञानता और पशुता से मुक्त कर श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त मानवता बनाए रखने का कार्य किया। भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय ज्ञान और प्रज्ञा का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत समन्वय है। वेदों में विद्या को मनुष्यता की श्रेष्ठता का आधार माना गया है। शिक्षा प्रणाली ने मानसिक और शारीरिक विकास दोनों पर ध्यान केंद्रित किया।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eप्राचीन शिक्षा प्रणाली ज्ञान, परंपराएँ और प्रथाएँ मानव को प्रोत्साहित करती थीं। भारत में तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी, उज्जैन और काशी जैसे शिक्षा केंद्र तत्कालीन विश्व प्रसिद्ध थे, जहाँ विदेशों से भी विद्यार्थी ज्ञानार्जन के लिए आते थे। वर्तमान समय में नई शिक्षा नीति भारतीय परंपरा और गौरव को महत्व देती है। आज भारतीय ज्ञान की उपादेयता को देखते हुए विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को पढ़ाया जा रहा है ताकि छात्रों को प्राचीन भारतीय ज्ञान का परिचय हो और वे जीवन में उसका उपयोग कर सकें।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eभारतीय ज्ञान परंपरा ने धर्म, दर्शन, अध्यात्म, आयुर्वेद, योग आदि के माध्यम से विश्व को अमूल्य देन दी है। वेद, पुराण, महाभारत, रामायण से लेकर चरक और सुश्रुत के योगदान तक, मध्यकालीन ज्ञान परंपरा, भक्ति आंदोलन, स्वतंत्रता की राष्ट्रीय भावना और आधुनिक विज्ञान—इन सभी में परस्पर संबंध स्पष्ट दिखाई देता है। भारतीय दर्शन की दृष्टि से ज्ञान का विशेष महत्व है। चार्वाक, जैन, बौद्ध, न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदांत जैसे दर्शन ज्ञान परंपरा के अंग रहे हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eभारत ने संख्या प्रणाली का आविष्कार किया और शून्य से अनंत तक की अवधारणा दी। योग, वेदांग, आयुर्वेद और वैदिक विज्ञान आज भी आधुनिक दुनिया में उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति, पर्यावरण और मानव सदैव केंद्र में रहे हैं। विश्व को शांति, करुणा, दया और सहयोग जैसे मानवीय मूल्यों से जोड़कर रखने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eलेखिका ने इस ग्रंथ की रचना में परिवार, सहकर्मियों और विद्वानों के सहयोग को मान्यता दी है। प्रस्तुत पुस्तक से अनेक शोधकर्ता और छात्र लाभान्वित होंगे, ऐसी आशा व्यक्त की गई है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"Prime Publishing House","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52788600406335,"sku":null,"price":315.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0977\/4071\/8399\/files\/BhartiyaGyanParampara_Hindi_PopatBirari_1.jpg?v=1776251490"}],"url":"https:\/\/primebookss.in\/collections\/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a5%87.oembed","provider":"Prime Publishing House","version":"1.0","type":"link"}